*सादा जीवन-उच्च विचार: नियमों की राह पर चल सिद्ध परिवार ने कुमकुम के कदमों से किया नन्हीं लक्ष्मी स्वरूपा "भाव्या सिद्ध" का सत्कार*
नोखा। श्री गुरु जसनाथ जी द्वारा प्रतिपादित 36 नियमों की मूल आत्मा 'दया, शील, संतोष और नारी शक्ति का सम्मान' है। समाज के इन महान संस्कारों को धरातल पर उतारते हुए अखिल भारतीय जसनाथी महासभा के पूर्व राष्ट्रीय महामंत्री व समाजसेवी सादुलनाथ सिद्ध के परिवार ने समाज के सामने कन्या सम्मान की एक अनूठी मिसाल पेश की है।
'सादा जीवन, उच्च विचार' के धनी सादुलनाथ जी ने अपनी सभी आठ बेटियों को उच्च शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाकर समाज को नियमों की सच्ची पालना का संदेश पहले ही दिया था। अब इसी गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ाते हुए उनके पुत्र - पुत्र वधू लोकेश लक्ष्मी सिद्ध के यहाँ पहली संतान के रूप में पुत्री (भाव्या सिद्ध) का जन्म हुआ।
इस पावन अवसर को पूरे सिद्ध परिवार ने किसी साधारण उत्सव की तरह नहीं, बल्कि एक 'महामहोत्सव' के रूप में मनाया। नवजात बालिका "भाव्या" के गृह प्रवेश पर उसके पैरों को कुमकुम से रंगकर, थाली पर उसके शुभ पदचिह्न अंकित किए गए और साक्षात लक्ष्मी रूप में स्वागत हुआ।
सादुलनाथ जी का कहना है:"बेटियाँ कभी बोझ नहीं, बल्कि कुल का वास्तविक गौरव होती हैं।"नियमों की पालना और बेटी के प्रति ऐसा अगाध स्नेह दिखाने वाले आदरणीय सादुलनाथ जी और लोकेश जी के इस सराहनीय कदम के लिए पूरे सिद्ध परिवार को हार्दिक बधाई एवं नन्हीं "भाव्या" को उज्ज्वल भविष्य का शुभाशीष!
