8 बेटियों के गौरवान्वित पिता ने पोती के जन्म पर मनाया महामहोत्सव: नोखा में सिद्ध परिवार ने पेश की अनूठी मिसाल
नोखा (बीकानेर)। 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' के राष्ट्रीय संदेश को धरातल पर चरितार्थ करते हुए नोखा में एक अनुकरणीय और प्रेरक मिसाल देखने को मिली है। स्वयं 8 बेटियों के गौरवान्वित पिता रहे अखिल भारतीय जसनाथी महासभा के पूर्व राष्ट्रीय महामन्त्री व शिक्षा विभाग के सेवानिवृत्त यूडीसी श्री सादुल नाथ सिद्ध के परिवार में इस बार पोती का आगमन हुआ है। श्री सादुल नाथ सिद्ध के सुपुत्र श्री लोकेश सिद्ध के निवास स्थान पर पहली पुत्री (पोती) के जन्म को पूरे परिवार ने एक महामहोत्सव के रूप में मनाया है।
कुमकुम कदमों से हुआ 'लक्ष्मी' का गृह-प्रवेश
धार्मिक व सांस्कृतिक रीति-रिवाजों के अनुसार, नवजात लाडो को साक्षात लक्ष्मी का रूप मानकर उसका पारंपरिक स्वागत किया गया। इस दौरान:
नन्ही परी के पैरों को कुमकुम (रोली) से रंगा गया।
वस्त्र और थाली पर उसके 'कुमकुम कदम' (पगलिया) अंकित किए गए।
अत्यंत गरिमामय और भव्य तरीके से लाडो का गृह-प्रवेश करवाया गया।
इस भावुक और ऐतिहासिक क्षण के साक्षी पूरे परिवार के साथ-साथ आस-पड़ोस के लोग भी बने।
बेटियां बोझ नहीं, कुल का गौरव हैं: सादुल नाथ सिद्ध
स्वयं 8 बेटियों की परवरिश कर समाज के सामने पहले से मिसाल कायम करने वाले श्री सादुल नाथ सिद्ध ने समाज को एक सशक्त संदेश देते हुए कहा:
"बेटियां बोझ नहीं, बल्कि कुल का गौरव और साक्षात लक्ष्मी का स्वरूप होती हैं। आज पोती के रूप में हमारे घर फिर से लक्ष्मी आई है।"
सिद्ध परिवार द्वारा समाज में लैंगिक समानता और कन्या सम्मान को बढ़ावा देने वाली इस अनूठी पहल की पूरे क्षेत्र तथा जसनाथी समाज में जमकर सराहना की जा रही है।
